रविवासरीय ऑक्टोइख़
„रविवासरीय ऑक्टोइख़“ एक आराधना-ग्रंथ है, जिसमें आठ स्वरों की रविवासरीय आराधना के भजन संकलित हैं। प्रत्येक स्वर में महा सान्ध्य-वंदना, प्रातःकालीन वंदना और दिव्य लिटुर्जी के पाठ दिए गए हैं, जिनमें रविवासरीय स्तिखिरा, त्रोपारिया, कानोन, सेदालेन, अंतीफ़ोन तथा अन्य भजन सम्मिलित हैं। ग्रंथ का केंद्रीय विषय मसीह के पुनरुत्थान, मृत्यु पर उनकी विजय और मनुष्यों को प्रदान किए गए उद्धार का महिमागान है। यह संस्करण आराधना में प्रयोग के लिए है और ऑर्थोडॉक्स भजन-साहित्य तथा रविवासरीय आराधना की संरचना के अध्ययन के लिए भी उपयोगी हो सकता है।